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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
हमबिस्त्री करने तक ही मोहब्बत में वफा होती है और न हुई तो बेवफा है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
नियत भी वाजिब रखो शाहब सिर्फ कुर्बानी करना वाजिब नहीं है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सच बोलो बेटा भले ही जमीर गिरवी रखने वाले लोगो को कोई फर्क नही पड़े,लेकिन आने वाली नस्ल को अच्छी सिख मिलेगी।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
यहां लोग जिस्म बेचकर इज्जत कमा लेते है,लेकिन इज्जत बेचकर कोई शोहरत नही कमा पाते है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
बदलाऊ लाना सब चाहता है लेकिन बदलना कोई नहीं चाहता।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सच बहुत करवा होता है सब को पता है लेकिन सच बोल तो लोग उम्मीद खत्म कर लेते है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
गरीब हूं इसलिए लोग मुझे इग्नोर कर रहे है,लेकिन पैसे वाला होता तो लोग मेरे आघे पीछे सर सर करते रहते।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
किसी की अच्छाई परखनी हो तो मोसीबत में याद कर के देखो कोई काम नहीं आएगा चाहे वो मोहब्बत हो या दोस्ती।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जरूरी नहीं की मोहब्बत में ही दिल टूटता है कभी कभी लहजा बदल के बात करने से भी दिल टूट जाता है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
उठ बेटा दुनिया बहुत मतलबी हो गई है मैं खुद कफन ओढ़ लूं या तुम खुद दुनियां को कफन ओढ़ा ओगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
ईमान का जनाजा निकाल कर लोग हफ्ते में एक दिन दो रिकात नमाज अदा करते है जन्नत हासिल करने के लिए।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मैं अंधा नही हूं मेरी कमजोरी ने मुझे मजबूर कर दिया है,क्योंकि मैं सब के नियातो से गाफिल हूं कौन केतना किस का हमदर्द है।
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