Pratibha Khadekar 25 Oct 2026 गीत समाजिक प्रतिभा खडेकार 81 0 Hindi :: हिंदी
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*गीत - पगवा वे..
*[मुखड़ा - धीमी लय में]*
बस्ते हैं मिलते-जुलते,
ना जाने कितने ग़म बुझा पीछे,
कितना सफ़र बाटा हमने,
साथ में, साथ में...
*[अंतरा १]*
पीपल तले, बदली के नीचे,
टाँगा था रस्सी वाला झूला,
खिलखिलाया, खिलखिलाया हमने,
बेह-बिहार ख़्वाबों का मेला।
*[अंतरा २ - थोड़ा तेज]*
शगुन सा है मिलता-जुलता,
नीम तोरी पत्तियों की शीतल हवा में,
धन-दो-निंदिया पगवा वे,
घुल गयी शाम मेरी हवा में।
*[मुखड़ा दोहराव]*
मेरी मेरी श्याम कहाँ,
मोर चीखे... मोर चीखे...
,,,, प्रतिभा खडेकार
7517947668