Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

पगवा वे This post in Under Review

Pratibha Khadekar 25 Oct 2026 गीत समाजिक प्रतिभा खडेकार 81 0 Hindi :: हिंदी

---

*गीत - पगवा वे..

*[मुखड़ा - धीमी लय में]*
बस्ते हैं मिलते-जुलते,
ना जाने कितने ग़म बुझा पीछे,
कितना सफ़र बाटा हमने,
साथ में, साथ में...

*[अंतरा १]*
पीपल तले, बदली के नीचे,
टाँगा था रस्सी वाला झूला,
खिलखिलाया, खिलखिलाया हमने,
बेह-बिहार ख़्वाबों का मेला।

*[अंतरा २ - थोड़ा तेज]*
शगुन सा है मिलता-जुलता,
नीम तोरी पत्तियों की शीतल हवा में,
धन-दो-निंदिया पगवा वे,
घुल गयी शाम मेरी हवा में।

*[मुखड़ा दोहराव]*
मेरी मेरी श्याम कहाँ,
मोर चीखे... मोर चीखे...

 ,,,, प्रतिभा खडेकार
     7517947668

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

पढता था मैं दिन रात किताबे, तो कभी किताबों में ज़िंदगी का अर्थ ढूँढा करता था पर जीना तो मुझे ज़िंदगी की किताबों ने सिखाया कोई मतलब नही थ� read more >>
चक्रधारी सुनो विष्णु जी ओ तुम मेरे मन को भाए.....2 तुम कृष्ण रूप में आए मां बाप का बढ़ाए तुम राम रूप में आए मां बाप के वचन निभाए चक्रधार� read more >>
ये खुदा बता तूने क्या सितम कर दिया मेरे दिल को तूने किसी के बस मैं कर दिया वो रहा तो नहीं एक पल भी आकर टुकडें- टुकड़ें कर दिये ना विश्वा read more >>
Join Us: