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धरती पुत्र के सपनों का हत्यारा कौन? लोकतंत्र या सरकार बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार कौन, युवा या सरकार? मोदी सरकार के पांच सालों पर एक सवाल? निजी सपनों की चाह या विकास की राह।-संतोष कुमार कोली

बिहार में बाढ़,राजस्थान में सूखा,हत्या किसान की।
टिड्डी, रोग, कर्ज़ से मरता, सस्ती क़ीमत जान की।
जो बच गया, सरकार, बिचौलियों के हत्थे चढ़ जाता है।
कृषि विधेयक, फ़रेबी वादों से बिन पके झड़ जाता है।
लोकतंत्र, आपदा दो चाबी,बंद किसान क़िस्मत का ताला।
भारत की जनता का, राम रखवाला।
बेरोज़गारी की बानगी,हरियाणा ३३.५,१७.५ राजस्थान में।
सब धंधे चौपट सरकार की, रह गई म्यान की म्यान में।
युवाओं की सोच में, रोज़गार नौकरी सरकारी।
हुनरमंद युवा बनों,नहीं यह मालिन की तरकारी।
सरकार, युवा, दोनों का एक परनाला।
भारत की जनता का, राम रखवाला।
अब की बार, मोदी सरकार,सरकार चौकीदार की।
नागरिकता संशोधन,तीन तलाक़,छुट्टी३७० रार की।
राममंदिर, नोटबंदी, खट्टे- मीठे फ़ैसले।
अमेरिका, चीन नीति, कईयों के फॅऺस गई गले।
निजी सपनों की चाह, विकास की राह दोनों मोदी की ख़ाला।
भारत की जनता का, राम रखवाला।
राम, राज दोनों एक, दोनों समान बरते।
इनके दिए दर्द को, सिर्फ़ ये ही हरते।
किसान, बेरोज़गार निष्ठा से, लहराता रहे तिरंगा।
सारे गिले -शिकवे बह जाएंगे,जब बहे विकास की गंगा।
सपनों की हत्या, बेरोज़गारी, है मकड़ी का जाला।
भारत की जनता का, राम रखवाला।

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