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बेटी की मान-बलराम सिंह

बेटी की सम्मान देश में,घायल परे हुए हैं
फिर किस दम पर हम,राम राज्य के उमीदे लिए हुए है।

क्या बेटी है अभिशाप जगत में,फिर मां कहा से आई है
ममता के सागर में जिसने,जीवन नया बनाई है।

अगर बेटी नहीं रहा जगत में ,क्या बेटा आ पाएंगे
फिर तो इस जगत से,मानव जाति ही मिट जाएंगे।

अक्सर बेटी की ही अपमान जगत में, क्यों होता रहता है
देश के शासक बहरे बनकर ,सोता क्यों रहता है।

शहर शहर और गांव गांव में,भ्रष्टाचार डटी हैं
इस लिए तो बेटी तन्हा सड़को पे,चलने में डरती है।

अन्याय पर न्याय नहीं तो,शासन किस लिए है
कुछ नहीं कर सकते तो फिर,आश्वासन किस लिए है।

जिस देश में मर्यादा का,मोल नहीं होता है
उस देश का निश्चय ही ,पतन जल्द होता है।

बड़ी बड़ी हम नारी रक्षा की,बात किए जाते हैं
वक्त परे तो उनकी रक्षा,क्यों नहीं कर पाते हैं।

फिर आओ मिलकर सब,इतिहास नया बनाते हैं
नारी शक्ति की दम,जन जन को बतलाते हैं।

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