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“” सिक्के के दो पहलू “”-अर्चिता-प्रिया

एक बार एक केकडा़ समुंद्र किनारे अपनी मस्ती में चला जा रहा था ,,,,,और बीच-बीच में रुक- रुक कर अपने पैरों के निशान को देखकर खुश होता जा रहा था ।
इतने में एक लहर आई और उसके सारे पैरों के निशानों को मिटा दी ।
इस पर केकडे़ को बहुत गुस्सा आया,,,,, उसने लहर से कहा…. “””ऐ लहर मैं तो तुझे अपना मित्र मानता था,,, पर यह तूने क्या कर दिया ….मेरे द्वारा बनाए मेरी सुंदर पैरों के निशानों को ही तू ने मिटा दिया ,,,,कैसी दोस्ती है तुम्हारी”” …..?
तब लहर ने कहा “”””वह देखो ! पीछे से मछुआरे लोग तुम्हारे पैरों के निशान देखकर ही तो केकडो़ को पकड़ रहे हैं ,,,,,
हे मित्र ! तुमको वह पकड़ ना ले,,, बस इसलिए मैंने निशान मिटा दिए””
सच यही है कि कई बार हम सामने वाले की बातों को समझ नहीं पाते हैं और अपनी सोच के अनुसार उसे गलत समझ लेते हैं ,,,,,जबकि हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं ।
अतः मन में बैर लाने से पहले बेहतर है कि हम सोच समझकर निष्कर्ष निकाले ।

शिक्षा …. बिना सोचे समझे कोई काम नहीं करना चाहिए ,,,,,किसी को भला-बुरा नहीं कहना चाहिए ।

धन्यवाद दोस्तों🙏🙏💐

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