दिन रात - Mk Rana

दिन रात     Mk Rana     कविताएँ     बाल-साहित्य     2022-08-16 15:59:00         4052           

दिन रात

 हर दिन एक चिट्ठी आती जो आज थी
हर रात एक चिट्ठी आती जो स्वप्न थी
हर दिन की चिट्ठी में लिखा खास थी
हर रात की चिट्ठी में लिखा चेतना थी

ऊपर वाले की लेख भी बहुत अजीब थी
दोनों के रास्ते अलग पर मंजिल एक थी
दिन को खो रहा था जो खास थी
रात को सो रहा था जो चेतना थी

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