एक उम्मीद-मंसूरी आयेशा

एक उम्मीद-मंसूरी आयेशा

एक उम्मीद हर दिल मे जाग कर जाती है।
हर किसी को इस से एक आहस सी लाग जाती है।एक उम्मीद पर कायनात कायाम कहलाती है।एक उम्मीद हि जनढागी मे आगी
बारने का कुछ कर ढिखाने का ढुबु को किनारे तक लाने का माँ बाप को बाछो से हो जाती है।एक उममीद क्या कया कर ढिखाती है।

 

मंसूरी आयेशा

मुंबई, महाराष्ट्र

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