अब बो रात बो रात न रही – हर्ष दीक्षित

अब बो रात बो रात न रही – हर्ष दीक्षित

अब बो रात बो रात न रही
अब उस रात में बो बात न रही
कहता है मुझसे ये मेरा दिल
अब दिवाली दिल बाली न रही….

व्हाट्सएप्प पर हजारों है सुभकामनाये
पर घर पर एक महेमान नही
कोन अपना है कोन पराया
इसकी कोई पहेचान न रही
कहता है मुझसे ये मेरा दिल
अब दिवाली दिल बाली न रही….

झालरों की भरमार है , पर
दीपो की बो माला नहीं
होता है अपनों में ही कॉम्पटीशन
कही भी बो अपनों बाली बात नही
कहता है मुझसे ये मेरा दिल
अब दिवाली दिल बाली न रही….

पटाखे बही, बम बही
न जाने क्यों ,बो बचपन बाली ख़ुशी नहीं
करते थे कभी जिसका , महीनो पहले से इन्तजार
न जाने क्यों , अब उसका बो इन्तजार नहीं
कहता है मुझसे ये मेरा दिल
अब दिवाली दिल बाली न रही….

रचियता
हर्ष दीक्षित

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