ऐ वक्त -दिव्यानि पाठक

ऐ वक्त -दिव्यानि पाठक

हर पल गुजर कर प्रतिपल बदलता हैं।
खिला फुल भी मुरछा कर अंकुर में ढलता हैं।
होटो पर हँसी तो दिल में तुफान पलता हैं।
कभी भय तो कभी अभय में इंसान ढलता हैं।

कोई भुख से तो कोई प्रतियोगीयो से जलता हैं।
कोई नफरत तो कोई प्यार से किसी को छलता हैं।
कोई स्वेवार्थ तो कोई स्नेह से बहलता हैं।
कोई जय तो कोई पराजय लिए चलता हैं।

 

 Divyani Pathak

   दिव्यानि पाठक
  सीहोर, माधियप्रदेश

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