बस शर्त इतनी है – सचिन ओम गुप्ता

बस शर्त इतनी है – सचिन ओम गुप्ता

sachin om guptaजिन्दा रिश्तों को जब भी संभाला जाए,
बस शर्त इतनी है की गड़े मुर्दों को उखाड़ा न जाए |

मेरी बदनामी का किस्सा बेशक उछाला जाए ,
बस शर्त इतनी है की मेरी नेकचलनी को भी सामने लाया जाए |

पत्थर के देवता का भोग बेशक निकाला जाए,
बस शर्त इतनी है की गरीब के मुँह में भी निवाला जाए |

साल की हर अमावस को दीवाली का त्योहार बना डाला जाए,
बस शर्त इतनी है की अँधेरे झोपड़ो में भी उजाला लाया जाए |

घर में कुत्तों को बेशक बच्चों की तरह पाला जाए ,
बस शर्त इतनी है की बूढ़े माँ-बाप को घर से निकाला न जाए |

मैं कहता हूँ ये मुर्दा जिस्म बेशक मेरा फूँक डाला जाए,
बस शर्त इतनी है की इसमें से मेरा जिन्दा दिल निकाला जाए |

Sachin Om Guptaसचिन ओम गुप्ता
चित्रकूट धाम (उत्तर प्रदेश)

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