चंदा की डोली

चंदा की डोली

छाई निशा घनेर,

हो गई है देर;

चंभित हुई अंबर को देख,

बोल उठी चम्पा भोली-

आ रही चंदा की डोली।

 

पवन चल रहा जोर-जोर,

अंधकार फैला चारों ओर;

वाचाल बनी सिंधु-लहरों की बोली,

आ रही चंदा की डोली।

 

सभी ऊँघ रहे स्वप्न में,

चादर ओढ़े सदन में;

प्रस्थान की संग तारकों की टोली,

आ रही चंदा की डोली।

 

खिल उठी रातरानी प्यारी,

दमक उठी पृथ्वी जननी हमारी;

किए पूर खुशियों से झोली,

आ रही चंदा की डोली।

 

–    सचिन अ. पाण्डेय

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