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दिन कभी रुकते नही – माधव मुळे

देखा था जो खॉब मैने
वो खॉब बनके रह गया
सारे दर्द प्यार मे
मै अकेला सह गया

उसकी कोई गलती न थी
प्यार तो मै ही करता था
नही बोली थी वो फिरभी
उसके आगे पीछे घुमता था

शादी उसकी हो गयी
अब बच्चे मामा बोलते है
मेरे पुराणे जखमोपर
यू मिरची वो डालते है

मुझमे क्या कमी थी
एक बार उसने बोलना था
मेरे सामने आकर
अपना पुरा राज खोलनाथा

अब देखती है पगली
मेरी अच्छी खासी गाडीको
नजर लगाये बैठी है
मेरी बीवी कि साडीको

दिन सभिके आते है
घमण्ड मे यू लोग जिते है
औकात दिखाके गरीबो को
खुद गरीब हो जाते है

Madhav muleमाधव मुळे

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

1 thought on “दिन कभी रुकते नही – माधव मुळे”

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