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” एक दिन घोर कलयुग आएगा “-विनय-कुमार-पासवान

“एक दिन घोर कलयुग आएगा ”
मानव मानव को ही खा जाएगा,
भाई भाई को न पहचानेगा ।
पुत्र पिता धर्म भूल जाएगा ।।
“एक दिन घोर कलयुग आएगा ”

शिष्य न गुरु को पहचानेगा ,
गुरु न गुरु का धर्म निभाएगा ।
झूठे का बोलबाला होगा ,
सचाई सब भूल जाएगा ।।
“एक दिन घोर कलयुग आएगा ”

बस्र का अपमान होगा ,
निर्बस्त्र को सम्मान मिल जाएगा ।
आएगा वैसा दिन भी एक दिन ,
जिस दिन नंगा सब नाच दिखायेगा ।।
“एक दिन घोर कलयुग आएगा ”

‘मीठा ‘ मीठा नही रह जाएगा ,
तीखा सब पर छा जाएगा ।
प्रेम न प्रेम रह जाएगा ,
दोस्ती को दुश्मनी खा जाएगा ।।
“एक दीन घोर कलयुग आएगा ”

                 विनय कुमार पासवान 
                         धन्यवाद 

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