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बावरी हुई तेरी राधिका पुकारे-बलकावी-जय-जितेंद्र

ओ कृष्ण कन्हैया, दाऊ के भइया।
हैं कितने नटखट, गाय के चरवईया।।
जो रहते हैं साँझ-सवेरे, जमुना किनारे।
बावरी हुई तेरी, राधिका पुकारे।।

जो सबके हैं प्यारे, राज दुलारे।
हैं आंखों के तारे, जग से न्यारे।।
जो दर्शन है देते, द्वारे द्वारे।
बावरी हुई तेरी, राधिका पुकारे।।

माखनचोर हैं, जग से निराले।
मोर मुकुट है, बांसुरी वाले।।
साँवली सूरत है, नैन कजरारे।
बावरी हुई तेरी, राधिका पुकारे।

   ~बालकवि जय जितेन्द्र
      रायबरेली (उत्तर प्रदेश)

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