हूं कश्मीर तुम्हारा गीत मैं -अनुश्री दुबे

हूं कश्मीर तुम्हारा गीत मैं -अनुश्री दुबे

आज कश्मीर लोगों से कुछ कहना चाहता है छोटा सा संदेशा है। ध्यान दीजियेगा।

रे पहचानो पहचानों मुझको मैं हूं कश्मीर तुम्हारा।
जिसको तुमने अपने हाथों से सीचा और सवारा।
हथेली पर सरसों उगाते थे फिर नफरत क्यों उगाई।
भाईयों ने भाईयों के बीच ये आग क्यों लगाई।
रक्त बहाते फिरते नागों को क्यों पाल रहे हो।
जो फैसला लेना तुमको ले लो क्यों टाल रहे हो।
रे पहचानो पहचानों मुझको मैं हूं कश्मीर तुम्हारा।
जिसको तुमने अपने हाथों से सीचा और सवारा।
दाऊद और हाफिज जैसे लोगों को देते हो सहारा।
जो छीनने की कोशिश करते है सुख चैन हमारा।
रे पहचानो पहचानों मुझको मैं हूं कश्मीर तुम्हारा।
जिसको तुमने अपने हाथों से सीचा और सवारा।

Anushree Dubey
         अनुश्री दुबे
      इटावा, उत्तर, प्रदेश                                   
   
                      

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