इक दिल – मुनमुन सिंह

इक दिल – मुनमुन सिंह

इक है माँ का ऐसा दिल
रुठ जाती हूँ मैं।
टूट जाती हूँ मैं।
मुझे मनाती है माँ
इक है माँ का ऐसा दिल
कालेज चली जाती हूँ मैं
बहुत रोती हूँ मैं।
बस मेरे धड़कन की आवाज सुनती है माँ
इक है माँ का ऐसा दिल
जब खुद है रोती माँ
खुद भोजन नहीं करती
हमको खाना खिलाती है माँ
इक है माँ ऐसा दिल
जब उदास बैठती हूँ मैं
हो जाती हूँ हतोत्साहित
मुझे उत्साहित करती है माँ
इक है माँ का ऐसा दिल

मुनमुन सिंहा
चकरामपुर (मिर्जापुर)

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