कविता – हेमंत जोशी

कविता – हेमंत जोशी

बात बड़ी जो करे, और खुद को बड़ा भी कहे l
ऐसा करने से बड़ा कोई बन जाता नहीं ll

जो जबां से मीठा हो ,और खुद से भला ही रहें l
ऐसा इसां दिल में घर बना पाता नहीं ll

जो गुलिस्तां में खिले,और खुद महकता ही रहे l
ऐसा फूल कीचड में खिल पाता नहीं ll

कितनी बातों को किताबो में कैद करके रखा है,
कितना भी पढ़ ले, कुछ समझ में आता नहीं ll

अब तो तन्हाईया भरी महफ़िल में सवाल करती हैं,
तन्हा तन्हा हमसे भी अब रहा जाता नहीं ll

य़ादों का काफिला चलता है, तेरे ज़ाने के बाद
दिल ए दरबार से चेहरा तेरा अब जाता नही ll

Hemant Joshiहेमंत जोशी
चंडीगढ़

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