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किसी के धोखा देने पर-सुनीता प्रजापत

किसी के धोखा देने पर
क्या तुम बैठ जाओगे
ग़मों के साए में
तुम्हें नहीं जीना है
अपना यह जीवन
एक नई उम्मीद
नए सपनों के साथ ‌।

धोखा देने वाले
होते दुनिया में हजार
लेकिन उनका तो क्या
कर देते हैं वो
तुम्हें दखल अपने से
फिर क्या जीना
भूल जाओगे तुम
उनके धकल कर देने से।

अपनी निगाहों से जरा
इक बार तो तुम देखना
तुम्हारे बेजान कल्ब को
चैन देने वाला कोई
तुम्हें भी मिल जाएगा
सहारा देने वाला तुम्हारा अपना।

कवयित्री सुनीता प्रजापत

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