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कविता -कौन थी वो -रवि-कैथवास

          कौन थी वो

जो मेरे जिंदगी में इस कदर आई
कि आई पर मुझे ना मिल पाई
सपने देखे मैंने बहुत उसके लिए
पर वह सपने ही रह गए मेरे लिए
तारीफ भी करो तो कम पड़ जाती है
उसके लिए।
लब्जो से नहीं आंखों से बातें कर जाती है
रोज मेरे ख्वाबों में आती है और
कुछ कह जाती है।
न जाने क्या जादू कर जाती है
पर कभी मिलने नहीं आती है
काफी समय से देखा नहीं उसको
पर याद तो बहुत आती है
पर कभी-कभी सोचता हूं
जितना मैं याद करता हूं उन्हें
क्या उन्हें भी हमारी याद आती है।

-Ravi kaithwas

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