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कुछ लोग -माला-चौधरी

कुछ लोग मेरे शब्दों से मेरे अंदर देखना चाहते है
😑
नादान है बड़े , किनारे पे बैठ कर समन्दर देखना चाहते हैं
😏
एक सैलाब है , जलजले का आलम है
💔
बेखबर हैं वो जिससे वो मंजर देखना चाहते हैं
😎
सुलगता पिघल ता लावा है मेरे सीने के अंदर
😑
उतर गया जो मेरी रूह में धोखे का वो खंजर देखना चाहते हैं
💔
कुछ लोग मेरे शब्दों से मेरे अंदर देखना चाहते हैं
😑
नादान है बड़े, किनारे पे बैठ कर समन्दर देखना चाहते हैं
😎

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