मजहब-माधव दादाराव मुले

मजहब-माधव दादाराव मुले

मजहब मेरा मत कर इन्सा
यहा हर मजहब तेरा है
मत भूल हिंदुस्थान हमारा हमे
मजहब से भी प्यारा है

हिंदू और मुस्लिम तो
एक दुजे का सहारा था
सियासद ने लढवा दीयारे
यह चुनके आने का बहाणा था

भगवा क्यारे हरा क्यारे
यह तो बस रंग है
नही जितेंगे लढवाने वाले
जबतक हम संग है

मंदिर मज्जीद मत कर पगले
सबका मालिक एक था
सत्ता हासिल करणे वालो का
कहा इरादा नेक था

समजदार अब बन रे इन्सा
मजहब के लिए झगडना छोड तू
एक साथ अब मिलकर
देश के खातीर लढ तू

 

Madhav Mule

 

माधव दादाराव मुले

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