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मेरा घर है फूलों का सुंदर बागवान जिनमें है-शशिकांत कुमार

मेरा घर है फूलों
का सुंदर बागवान जिनमें है
रंग बिरंगे फूल अनेक
एक फूल रूट जाए तो
सारे फूल रूट जाते हैं
रूठे फूल मुस्कुराए तो
सारे फूल खिल जाते हैं
जब पढ़ती है सूर्य की लाली किरणे फूलों के दादा जी जग जाते हैं साथ उठाते दादी को
कुछ मधुर गीत गुनगुनाते हैं
पास के दुकान से कुछ उर्वरक ले आते हैं जिन्हें पाकर सारे फूल सोर गुल मचाते हैं सोर गुल
सुनते ही फूलों के पापाजी जग जाते हैं थोड़ा गुसाते और चिल्लाते हैं सारे फूल
सर झुकाए अपने कमरे में
छिप जाते हैं जब पापा प्यार
भरी बातों से उन्हें मनाते हैं
तब सारे फूल मंद मंद मुस्कुराते हैं फूलों की मम्मी की है बात निराली सूखे साडे गले फूलों में भी डाल देती है हरियाली दिन भर करती है सिर्फ काम ही काम और अपने फूलों को देती है आराम कहती है इन्हीं फूलों में बस्ती है मेरी जान इन्हीं फूलों से होगी मेरी पहचान

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