मेरा जबाव मेरी तन्हाई – अनुश्री दुबे

मेरा जबाव मेरी तन्हाई – अनुश्री दुबे

मैं हंस कर बोली ‘बहन’
तुझमें मुझमें फर्क इतना है
 तूं हर पल लोगों का
भोझ बनकर जीती रहती है
और जो तेरे सामने है
अरे वो तो हर रोज
दुनियां का भोझ बन कर
जीते हुए पल-पल मरती है
कोई मिल जाता है तो
मन से कम होता है
तन्हाई का भोझ लोगों के
मुझको कोई मिलता है तो
मुझे घुटन होने लगती है
तुझसे परेशान होकर इंसान तो
खुद को नष्ट करता है
और मुझसे परेशान होकर इंसान
मुझको नष्ट करना चाहता है
झुठलाऊं मैं यूहीं कब तक
मैं तो एक भोझ हूं
और तुम तो सिर्फ एक
मन में रहने वाली ही
मन की एक तन्हाई है
                      Anushree Dubey  
 अनुश्री दुबे     
 इटावा  ,उत्तर प्रदेश

Anushree Dubey

मैं अनुश्री दुबे इटावा उत्तरप्रदेश की निवासी हुँ। मैं करुण रस की कवित्री हुँ। मैं कक्षा 12वी की छात्रा हुँ।

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