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पत्ते की सांसे – पूजा कुमारी

पत्ते की सासे है पतझर की नही|
मनुष्य की जिदंगी है निर्झर की नही|
यही हमारी अपनो से सीख मिलती हैं|
पत्ते की डाली पर करोड़ो की पत्ते रहते है|
इसी तरह मनुष्य के सिर पर भी बाल रहते है|
पत्ते गिर जाएँ तो उसका कोई मान नही होता|
मनुष्य का जीवन भी इसी तरह के होते हैं|
अगर हमारे देश मे लड़कियो के साथ योण शोषण
होता है तो उसका भी कोई मान नही होता हैं|
दुनिया कभी नही समझकता है|
अगर पत्ते गिर जाते है तो फिर भी उसका प्रयोग
हमसब कर लेते हैं|
लेकिन दुनिया यह क्यो नही समझता हैं|
लड़कियो के साथ भले ही योण शोषण हुआ हो|
पर बह हमारी देश की बेटी हैं|
संसार मै किसी तरह के भेदभाव नही होते हैं|
दुनिया मै मनुष्य आते है फिर चले जाते हैं|
पर उसका स्भाव नही वदलते हैं|

Pooja Kumariपूजा कुमारी
समस्तीपुर बिहार

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Pooja Kumari

Pooja Kumari

मैं पूजा कुमारी समस्तीपुर बिहार की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ।

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