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” सच्ची ख़ुशी ”- मनोरमा

देखा है मैंने भी,
आधी अधूरी दुनिया को।
यूँ ही नहीं ,
वास्तविकता की गहराइयों में डूबकर।
खुशियाँ कई रूपों में पड़ी है ,
दुनिया के हर कोने पर।
यहां तक की ,
जिंदगी के कई सुनेपन में भी
कोई ढूंढ लेता है खुशियाँ ,
जिन्हे होता है खुशियों से प्यार।

तभी जिंदगी के सादगी एकांकपन में ,
बैठी मैं लगी सोचने
उन खुशियों के बारे में ,
जो फैली है ,चहुंओर।
क्या वास्तविकता भी है इनमे कोई ,
या क्षण भर के लिए
दिखावा मात्र है।
या इनमे है उम्मीदों की बंधी डोर
और उम्मीदे भी ऐसी की,
जिनमे पाने की चाह है, देने से ज्यादा।
अगर मिला ना बदले में ,
तो सारी खुशियाँ बेकार।

तभी मुझे कुछ समझ आया ,
जिंदगी के असली खुशियों की
वो है ,
‘ देने की ख़ुशी ‘ !
अगर है हिम्मत मुझमे,
किसी अधरों पर मुस्कान लाने की
तो यकीन मानिये ,
मुझसे ज्यादा संसार में
कोई खुश नहीं है।

यही है स्वतंत्रता ख़ुशी की ,
जो क्षणिक मात्र नहीं।
वो अनंत काल है जिसमे
किसी दुःखो की कोई परवाह नहीं।
ये है सच्ची इंसानियत की ,
बेमिसाल खुशी।
और शायद मेरी समझ से
है यही सच्ची ख़ुशी।

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Manorama-Manorama

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Date Of Birth-01/06/2000 Hobbies-Writing Poeam,Articals To do Motivation and be always Motivate..

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