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गरीब की बरखा-दिलबाग सिंह

वो कैसे कह दें कि, सावन भादों की बरखा रंगीली हैं ।
जिसके पेट में आग भूख की और चूल्हे पर खाली पतीली हैं।।
वो कैसे नज़रे मिलाएं उसकी बरखा इतनी हठीली हैं।
जिसकी आंखों में पानी और झोपड़ी की छत गीली हैं।।

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