स्वार्थ – राजपुत कमलेश ” कमल “

स्वार्थ – राजपुत कमलेश ” कमल “

क्या कहे किससे कहे,
अब कहा जाता नही!
जो दर्द होता है हृदय में,
अब सहा जाता नही!!
है कौन जन जो इस जहाँ में,
नि:स्वार्थ बन कर है जिया!
स्वार्थी हर जन यहाँ के,
स्वार्थ सब में है बसा!!
स्वार्थ के कारण ही बेटा,
बाप हमको है कहे!!
स्वार्थ के कारण ही पत्नी,
नाथ हमको है कहे!
स्वार्थ के कारण ही भ्राता,
तात हमको है कहे!!
इस स्वार्थ के चक्कर,
स्वार्थी हम बन गए!!

Kamlesh Rajput(Kamal)राजपुत कमलेश ” कमल “
अहमदाबाद (गुजरात)

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account