” टूटे हुए घर ” – अमनदीप

” टूटे हुए घर ” – अमनदीप

बेबस से होकर गिरते देखे हैं, तड़प तड़प कर दम तोड़ते देखे हैं।
कभी-कभी प्यार से गले लगाकर मिलते हैं, तूने जिस तरह से मुझे छोड़ा।
मुझे अब सपनों में टूटे हुए घर और दूर तक वीराने मिलते हैं।

तेरी हंसी अब भी कानों में गूंजती है,
आंखें बंद कर जब भी तुझे भूलने की कोशिश करता हूं तू मुझे बुलाती दिखती है।
अब मैं तेरा इंतजार करते-करते थक गया हूं, कोई छोटी सी उम्मीद ही दे जाती तू जाती जाती।
मुझे अब सपनों में टूटे हुए घर और दूर तक विराने मिलते हैं।

—अमनदीप

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