Bholenath sharma 14 Apr 2024 कविताएँ समाजिक अब हुनर आ गया 32341 0 Hindi :: हिंदी
मांगते थे खुशी पर
केवल मिलता रहा गम ,
होकर निडर चले पड़े
गम से लड़ने के लिए हम ।
देर लगी इस लड़ाई में हमें मगर दुनिया दारी का हमको शऊर आ गया जिंदगी जाने का हमको अब हुनर आ गया