Join Us:
20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

भारत भाग्य विधाता

Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम #भारत भाग्य विधाता कविता#ambedkarnagarpoetry#rbpoetry#प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ#आधुनिक कविताएँ#सभी कवियों की कविताएं#सबसे अच्छी कविता#कविताएं हिंदी में लिखी हुई#छोटी सी कविता हिंदी में 43111 0 Hindi :: हिंदी

भटक रही थी बूढ़ी महिला
तम तमाती धूप में |
अधमरी सी झुकी खड़ी थी, 
कंकाल के रूप में  ||
उपल ,कण्डा उठा उठा कर ,
भर रही थी टोकरी. |
चाह जीने की प्रबल थी, 
मार रही थी भुखमरी, |
कोई खाए जूठा पत्तल,
सोये सड़कों के फुटपाथ |
भारत का तु भाग्य विधात्री, 
आज बनी है तु अनाथ,||
एक चार की बात नहीं है, 
अरबों हैं तेरे संतान,|
कहां छिपा ज़मीर तुम्हारा , 
मानवता के इंसान, ||                         
किस भारत माता की सदा,
कर रहे हो जय जयकार |
मां तो भटक रही सड़को पर,
हो रहा कैसा अपकार?
देश कभी न बड़ा बनेगा,
यदि होगा जन का अपमान,|
भारत का तु भाग्य विधात्री,
यह कैसी तेरी सम्मान ||
धरती तु है भारती तु है,
भारत भाग्य विधाता तु है,|
गॉंव देश की बात करू क्या?
पूरे विश्व की माता तु है ||
 कब तक होगा अपमान तुम्हारा
कब तक सहोगी अत्याचार
अब होगा सम्मान तुम्हारा
मातृदिवस के रूप में
पूजी जाओगी माता तुम
मां भारती स्वरूप में ||
_________________
___________________

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
Join Us: