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नन्हा पौधा - बोया था मिट्टी में बीज

Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #नन्हा पौधा, कविता#Ambedkar Nagar poetry#rbpoetry#Rambrikshpoetry 41758 0 Hindi :: हिंदी

बोया था मिट्टी में बीज 
यह सोचकर, पेड़ बनेगा |
छाया देगा जीव जंतु को ,
फल भी सारा ढेर लगेगा ||
रोज देखता कब निकलेगा ,
नन्ना मुन्ना अंग सलोना |
हाथ पाव सा पत्ता कोमल
मेरा हीरा मोती सोना ||
अंकुर फूटा, पड़ा दिखाई ,
होनहार चिकने पत्ते |
लगने लगा मुझे अब ऐसा ,
मेरे होंगे सपने सच्चे ||
समय को किसने पहचाना है,
क्या होगा किसने जाना है ?
जन्म- मरण का चक्र ही ऐसा ,
जो आया उसको जाना है ||
पीले पड़ गए कोमल पत्ते,
पड़ी जब उस पर काली छाया |
जीवन से तब हार गया वह,
जब अंत समय उसका आया ||
सोचा कुछ, हो कुछ जाता है ,
कभी कभी देखा ऐसा है|
लगता कभी अनोखा जीवन
कभी लगता जीवन धोखा है||
बन न पाया पेड़ बड़ा वह,
ना कर पाया काम बड़ा|
नहीं भरोसा इस जीवन का,
तब नाम समय का काल पड़ा ||

Rambriksh, Ambedkar Nagar

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