Chanchal chauhan 28 Jul 2026 कविताएँ बाल-साहित्य नन्हीं नन्हीं बूंदें 619 0 Hindi :: हिंदी
सावन की पहली फुआर, हरियाली की बनी बाहर, रिम झिम,रिम झिम बरसा पानी, नदियों की आई बाहर, नन्हीं नन्हीं बूदें गिरी कलियों पर, फूलों की आई बाहर, बाग बगीचे सब लहरा उठे, पेड़ पौधों की आई बाहर, भौरें गुनगुनाते फिरते, तितली की आई बाहर, मेहंदी हरा रंग ला गई, झूलों की आ गई बाहर। झूम उठा मन मोर का, नृत्य करने की आई बाहर।
Mera sapna tha apne bicharo ko logo tak phunchana unko jiwn ki sikh ,prerna dena unmai insaniyat jag...