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अब दीनदार भी बन जाऊं तो अच्छे लोग ही मुझ में ऐब ढूंढने लग जायेंगे। read more >>
मेरे तकलीफ में हर वो लोग जिम्मेवार है जो मुझे कहते ते थे मेरी आखरी उम्मीद तुम हो। read more >>
शाम देख कर मन ललचाया घर से बाहर जाने को, वृक्ष गणों की महक उड़ चली आसमान अपनाने को । घर से बाहर निकला तो दिखी खूब हरियाली थी , आसमान था � read more >>
शीर्षक (सुबह) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) रात्री कर पहरा खत्म होने को है,एक नई सुबह होने को है। प्रातः काल की बेला है आयी, दृश्य मनोरम read more >>
सन, सन सन्ननन झम्मर झम्मर झम, झप्पर - झप्पर आवाज़ों में! बनत्ती है खादी ज़ो बना स्वाधिनत्ता, का मुल त्तंत्र हर वादों में!! हर प� read more >>
जरा इक बात बाताओ तुम हार गये क्या सांस तो चल रही है पर अपने को जिंदा मार गये क्या। हाँ माना तुमने चोंट बहुत खा ली है जी read more >>
मां तेरी याद आती है,-2 मां तू मुझे लोरी गाकर सुनाती थी, मां तु गीले पर सोती और मुझे इस सूखे पर सुलाती थी, तंग करने पर मुझे डांटती थी न मानन� read more >>
मत पियो मोटियारा थे दारू। थारी बोली नी थारे सारू।। मत जाओ थे दारू र नैङा। ईनै नी पिवै गधैङा।। मत घाल तुं मुंडे माही जर्दो। थुख - थूख � read more >>
मत पियो मोटियारा थे दारू। थारी बोली नी थारे सारू।। मत जाओ थे दारू र नैङा। ईनै नी पिवै गधैङा।। मत घाल तुं मुंडे माही जर्दो। थुख - थूख � read more >>
दीपक झिलमिला रहा है एक हवा का आया झोका, अंधेरे को आने का मिला मौका, दीपक........ दीपक मैं बहुत था तेल और बाती, मैं छुपा लेता दीपक को नजर न आई ह read more >>
रात अंधेरी है, कोहरा घना है। हर शक्सियत यहां, डरा डरा है। तेरे तवज़ुम सा, करार छा गया । लो मैं ,हुबहुँ आ गया। कैसी तल्खियाँ ये कैसी अद� read more >>
तु मिल जा मुझे में फिर तुझसे प्यार करना चाहता हु दो पल नही ज़िंदगी भर तेरे साथ जीना चाहता हु..... तेरे भूलो को में भुलाना चाहता हु तेरे र� read more >>
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