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मांओं की मोहब्बत को ठोकर मार कर,किसी अजनबी के मोहब्बत का गुलाम बने हुए हो। read more >>
मैं बुरा ही सही हूं शाहब तुमने सही होकर क्या उखाड़ लिया है। read more >>
मां तेरे बारे में क्या लिखूं क्योंकि तेरे बिना मेरा वजूद ही नही है। read more >>
गरीब होन जुर्म नहीं है तो मोहब्बत अमीरों से क्यूं करते हो। read more >>
सब नियातों का खेल है शाहब क्योंकि जिनाह सिर्फ मोहब्बतों में देखाई देती है। read more >>
मैं खुद अपना नही हो पाया तुम् को पाकर क्या उखाड़ लूंगा। read more >>
मैं खुद ही अपना वजूद हूं। लेकिन तेरे मोहब्बत के सिवा मेरा वजूद नहीं है। read more >>
जिसने शुकून बनाया है। लोग उसे छोड़ कर एक पैसे के टुकरे में शुकून ढूंढ रहे हैं। read more >>
उम्र की सीमा नहीं ,है ,किस पार जाना,। कविता कहती है,सफर वहाँ तय हो, सन्नाटा रहित पनघट जिधर हो,। तब कहीं छलके भी तो ,यह आंखों का नीर , व्यर्थ read more >>
तुझे चाहने की गुनाह ने, हमे बीच मझधार मे डुबोकर रख दी सभलना चाहे हम जब- जब, तब- तब तेरी यादों ने जकर ली ✍✍💓💓💓💓👌👌💯💯👏👏 read more >>
चिलचिलाती धूप में लू के थपेड़ों के बीच पसीने से तर -बतर चिथड़ों में लिपटी एक बूढ़ी -सीऔरत अपने दो बच्चों के साथ सड़क किनारे बैठी भीख � read more >>
हां, ज़माना बदल रहा है। यह,समाज को छल रहा है। बच्चे, दादा-दादी के, सानिध्य में रहते थे। एक था राजा, एक थी रानी, किस्से सुनते थे। बहन, बेटी � read more >>
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