शीर्षक (वो बीते हुवे दिन)
मेरे अल्फ़ाज़ सचिन कुमार सोनकर
वो दिन बहोत याद आते हैं।
जब माँ के गोद मे बैठ के खाना खाते थे ।
पिता के कंधे पर स्� read more >>
जीवन एक पहेली है ,जीवन एक पहेली है,खुशियां और गम इसकी सहेली है जीवन एक पहेली है,जीवन एक पहेली है। कभी ये जीवन खूब रुलाती,कभी ये जीवन खूब र read more >>
जिंदगी की इस सफर में कोन अपना है ,
कोन पराया है ,कभी अपनो ने ही धोखा दिया तो कभी गेरो ने अपनाया है ,रिश्तो का न कोई मोल है ,सब पैसों का ही बो� read more >>