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मेरे राधेश्याम की अनोखी हैं छवि
मेरे राधेश्याम की अनोखी हैं छवि, मेरे अंखियों में छाई उनकी छवि, मेरे मन को भाये उनकी छवि।
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माँ जैसी कोई नहीं
माँ जैसी कोई नहीं लोरी गा सुलाने बालि प्यार से खिलाने बालि सही राह दिखाने बालि बला दूर भगाने बालि हमारी गलतियों को माफ़ करने बलि अ�
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कालचक्र के चक्र में
ये बक्त नहीं है रुकने का समय नहीं है झुकने का ये काल के पुकार हैं अवसर नहीं हैं टूटने का मौका बनाओ चल पड़ो अभी फुरशत नहीं सोचने का का�
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अमर है उसकी कहानी
इस मिट्टी की गाथा कैसे गाऊं, अनंत है इसकी गाथा। अनंत है इसकी कहानी। जो शहीद हुए इस देश के लिए , अमर थी उसकी जवानी। इस मिट्टी में ज
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अर्ध्नेशवर
मैं भी तो आप के जैसा बस थोड़ा सा अधूरा नर नारी दोनों मैं मेरे पास भी दो ऑंखें दो हाथ दो पैर सूरत भी आप से मिलता फिर काहे तू भागे हम से
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इश्क़बाज़
इश्क़बाज़ सुना हैं तू मुझ पे मरने लगी हैं मेरे ही नाम के माला जपने लगी ये हकीक़त हैं या कोई फ़साना तो नहीं सुना आज कल खूब तू सवरने लगी हैं
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मैं सैनिक हूँ
मैं सैनिक हूँ देश के रक्क्षक मैं सैनिक हूँ मैं देश की सुरक्क्षा करता हूँ सरहद के निगहबानी करता हूँ मेरे भी अपने हैं अपने भी कुछ सपने
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अभीष्ट सिद्धि
अनुराग प्रेम भक्ति लिए शहर शहर भ्रमण करता हूँ करुणा त्याग परित्याग किए जन जन को राग सुनाता हूँ सह सहमति अभीष्ट सिद्धि से जो गरीबी �
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इंडिया
नफ्रात बुरी है ना पलो इसे ,दिल में खालिश है तो हटा लो इसे, न तेरा ना मेरा हम सबका है ये वतन मिलकर संभालो इसे
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क्यो थाम रहे हो दहेज का दामन
क्यो थाम रहे हो दहेज का दामन, ना जाने कितनी नारी को दफन करने को,क्यो कर रहे उनका जीना दुश्वार ,क्यो मिटा रहे हो नारी को।
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ना जाने कितने इम्तिहान ले रही जिंदगी
ना जाने कितने इम्तिहान ले रही जिंदगी,बस परीक्षा देते जा रहे है फेल‌ हो या पास, मंजिल मिले या ना मिले चले जा रहें हैं।
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सच्ची दोस्त किताबें
आज से करीब दस साल पहले मैने एक किताब खरीदी थी चुटकुलों की, पर इस भाग दौड़ भरी ज़िंदगी ने मुझे उसके एक भी पन्ने को पढ़ने का मौका न दिया दौड़त
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