लगे भोला भाला, तू उसे फसाती है।
दिल चीर के जाती है, तू मुझे तड़पाती है।
क्या मेरी खता हो गई, हमको बता जानू।
ज़हर पिला के गई, में मौत क्या � read more >>
एक नन्ही सी कली हूं,
मां तेरे आंचल में ही पली हूं,
सिर्फ एक इंसाफ के लिए चली हूं,
वह इंसान जो हक है हमारा ,
फिर क्यों ?
फिर क्यों ?
नोच दिय� read more >>
डांट कर तो सब अपनापन दिखाते हैं,
लेकिन जो डांट कर मना सके,
वो शख्स चाहिए।
शक तो हर कोई करता है मुझ पर ,
लेकिन जो अटूट विश्वास दिखा सके ,
व� read more >>