जीवन मे सुख और दुख का एक ही आकार है फर्क बस इतना है कि सुख के आकार को हम भरते नहीं और दुख के आकार को गिन गिन के भरते हैं
लेखिका प्रेरणा शर् read more >>
आरंभ हो चुका है अंत का
अनंत में जो व्याप्त है,
शंखनाद उल्लास है
जगी ये कैसी प्यास है,
भाव विभोर हो चुकी
हृदय में उठती टीस सी,
बस नयन छलक � read more >>