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सजनी
सजनी गे दिल के प्यास बुझा दे हम छी तोहर दिल के चोर, बाजब तोहर बढ़ अनमोल अबि अबि के एक गीत सुना दे,सजनी गे दिल के प्यास बुझा दे मुखड़ा त�
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जिंदगी खत्म कर दी
तु मेरी जिंदगी थी लेकिन मैंने देखा कि तु किसी ओर की है तो दिल को बहुत दर्द हुआ फिर भी तुम्हें पाने की चाहत थी इसलिए मैंने खुद की जिंदगी
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जी करता है तुझे देखने को, तेरा हाल क्या है
यूं तो जमाल है हर शहर का, पर प्यार है तेरे शहर से,।। क्या खास है उस शहर मे, जो गया है तू,मेरे शहर से,।।।।। तु रुक ना सका, मै रोक ना प�
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तु हसती है तो ...
तु हसती है तो आसमान में तारे हंसते हैं तुझे देखने के लिए दिवाने तरसते हैं तु सिर्फ हसती रहो क्योंकि तेरा हंसने से चांद की भी हवा निकल
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कवि की अभिलाषा
कवि की अभिलाषा लिख जाऊॅं कुछ लेख लेखनी से अपने मैं कर पाऊं सब पूर्ण लोकहित के सपने मैं कर जाऊॅं इतिहास अमर अपनें अपनों का शोषण हो न
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स्त्री
स्त्री नदियों के जल सी तुम "मीठी" बंधी किनारों के दायरे में "बहती" उथल-पुथल गहराई सहती "रहती" कल कल की गीतों को गाती "चलती" सफ़र सुहान�
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इस जग में सिया के राम
कोई मांगे हरि तो, कोई मांगे श्याम मैं मांगू इस जग में सिया के राम।। रोम रोम है खाली रोम में बसावे राम कोई मांगे हरि तो, कोई मांगे श्य�
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क्यों?
क्यों? रात रात भर तेरे सपने क्यों आते हैं? सपनों में भी तेरी बातें क्यों भाते है? यदि चाहूं कि आंख मूंद कर सो जाऊं मैं नींदों में भी �
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झूल गए वो फांसी
झूल गए वो फांसी सीने पर गोलियां खाईं थी शहीद हुए वीर सपूत तब जब बजनी उनकी शहनाई थी। आंखों में सपना था भारत मां की आजादी का हर दौलत बे
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झूल गए वो फांसी
झूल गए वो फांसी सीने पर गोलियां खाईं थी शहीद हुए वीर सपूत तब जब बजनी उनकी शहनाई थी। आंखों में सपना था भारत मां की आजादी का हर दौलत बे
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दिल से शायरी
होगे अमीर तुम हैसियत से बहुत दिल के अमीर तो हम ही रहेंगे फासले लाखों हजार हो चाहे हमेशा तुम्हें हम याद रखेंगे।
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शायरी दिल से
दिल के करीब रहने वाले आवाज न दिल की सुन रहे हैं भरी भीड की महफ़िलों में भी तनहा अकेले हम जी रहे हैं।
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