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न ज़रूरत न हसरत, दूसरों को बदलने की। ज़रूरत व हसरत है, खुद के सुधरने की। वे तो न सुधर सके, उनका कोई ख़ता नहीं। सुधारने के फेर में, खुद कित� read more >>
उसूलों के सिक्के ये है हमारे पूर्वजों के सिक्के जिनके उसूलों पर आज हम चलते है वो है हमारे पूर्वजों के सिक्के वो हमारी संस्कृति हमार� read more >>
मां तुम्हारा ख्याल जैसे मां तुम्हारा ख्याल जैसे चहेरे की मुस्कान मां तुम्हारा ख्याल जैसे नीम की छाव मां तुम्हारा ख्याल जैसे वो तुम� read more >>
गुज़रते हरेक ज़माने से गुजरा हूँ मैं कभी हौसलों में ज़ोर था यादें आती हैं मीठी मीठी सी वो वक़्त नहीं बिखरता दौर था नफ़रतों में पलते अज़ीज़ read more >>
अचंभा क्या है? ताजमहल का बस तरासे चूना पत्थर ? शायद नहीं ! किया अजूबा इसे विश्व में , भाव छिपा क्या इसके अंदर ? देखा जब दूर से उस मीनार को read more >>
रोके रुके न नीर नयन से ,राम चले जब छोड़ भवन से जड़ चेतन हो शून्य चले थे,कुछ कहे कौन हो मूक बने थे दु:ख को सहे जब दे विधाता,यहां तो मैं ही थी read more >>
हमें सीढ़ियों की ऊंचाई से मत गिराओ,हम फिर चढ़ जायेंगे, किसी को गिराना नहीं, उठाना सीखों जिंदगी में कुछ कर जाओगे। चंचल चौहान मंझ� read more >>
खिलखिलाती चेहरे से बेहतर कुछ और नहीं होती, मेहनत करनी वालों की कभी हार नहीं होती। read more >>
कोशिश तो बहुत की भुलाने की तुझे, मौखिक रूप से तो यह बातें, दृढ़ता से कबूल कर ली थी मैंने, मगर तुझको भुलाने में हम खुद को ही भूल जाने ल� read more >>
कभी खुशियां कभी है ग़म । अजब है प्यार का मौसम। कितने खुशनसीब थे बो पल । जब मिले थे तुम और हम।।। read more >>
रास्ते तो लोग बता सकते है लेकिन मंजिल तुम्हे खुद की मेहनत और जुनून से ही मिलेगी..... read more >>
# कोरोना काल में मेरी समसामयिक रचना "क्षणिकाएं" (१) पौ फटते ही , लॉकडाउन लगते ही , बंद हो गई भट्टी शराब की । बेवड़ों के लिए read more >>
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