वो कहते थे कि हम उनकी जान हैं।
पर आज पता चला कि हम छोडी़
हुई एक झुठी फ रियाद हू़ँ।
थमा था हाथ ऊमर
भर कि
निभा ना सके एक पल कि
ना वो आऐ ना उ� read more >>
ईमान बेच चुके हैं, न जाने किस लाचारी में
खड़े हैं दो-चार, उस मक्कार की तरफ़दारी में
जिधर मिले मुनाफ़ा , उधर ही ढुनक जाते हैं
दो-चार बैंगन ऐस� read more >>
राह है...हिंदी...डगर है....हिंदी
गंगा में बहती लहर है.....हिंदी
नगर है...हिंदी..निगम है..हिंदी
रस छिंद का सागर भंवर है...हिंदी
भाव है...हिंदी....ल read more >>