मतला:
वक़्त के आईने में मेरा सच नज़र आता है,
जो मैं बनकर चलता हूँ, वही रूप बन जाता है।
हर लम्हा सवाल बनकर रूह से टकराता है,
मेरी खामोशी क� read more >>
दैनिक काव्य सृजन
दिन- बुधवार
दिनांक 21 -1 _2026
शीर्षक ----यादें ही यादें
जब शाम ढले मेरे घर पर यादों
की दस्तक होती है
मन फिर बेचैन होकर न जा� read more >>
आज की सुबह दिनेश के लिए नासूर बनकर उगी थी।
वह अब भी अपने बिस्तर पर लेटा था। आँखें खुली थीं, पर उनमें उठने का कोई इरादा नहीं था—
मानो रात � read more >>
दुनिया ने मुझसे पूछा, तूने क्या कमाया है,
मैंने कहा, मेरे दिल ने सुकून पाया है।
सोने की चाह में जब चैन को भुलाया है,
हर रात ने मुझे मेरे � read more >>
जंगल का राजा भी बन जाता है तमाशा यहाँ,
जब अपनी चाल छोड़ दे, दुनिया की भाषा यहाँ।
पिंजरे सोने के हों तब भी, घुटती है हर साँस यहाँ,
आज़ादी � read more >>