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जो कभी आया ही न उनके लिए-आँसू का माजरा
ये दिल-ए-नादाँ तु तबस्सुम भी रख जरा ,, जो कभी आया ही न उनके लिए तो न रख आँसू का माजरा !! 💞💞💞 - सौरभ सोनकर
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वज़ू कर लो- शायद लगे हों हाथों में ही खून के छींटे
वज़ू कर लो शायद लगे हों हाथों में ही खून के छींटे,, ये सत्ता जालिम है अपनी बरबादियों में मुस्कुराना सीख भी लो अब !! - सौरभ सोनकर
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मन मौजी है दूर खड़ा है
मन मौजी है दूर खड़ा है, मैं कहाँ हूँ वो कहाँ है, कुछ सोचा था भूल गया है। आज का मौसम कुछ ऐसा है, आज का मौसम मन जैसा है। युवा रचनाकार उज्ज
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विनम्रता की जीत- सपनों का सौदागर
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 प्रेरक कहानी- *!!विनम्रता की जीत!!* प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.... करण सिंह 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 👌👌👌👌 *सुब�
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अक्षेप
यांची टीपणी कायम माझ्यावर अक्षेप करतात, मला येत नाही काही. तुमच्या खालचा आंधार , तुम्हाला दिसत का नाही . चार फूट वाले लीलीपुट हे तर सा
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ख्वाहिशें- कुछ बड़ा करने की जब थी ख्वाहिश
कुछ करने की जब थी ख्वाहिश, दुनिया ने ना समझा, जब हमें किसी लायक, कुछ बड़ा करने की जब थी ख्वाहिश, सामने खोदी जब इस दुनिया ने हमारे गहरी खाई�
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कमबख्त फिर से एक और वो आया
शीर्षक :– मैं और वो Word –. Meaning मैं। – एस्पिरेंट या विद्यार्थी वो। –भ्रष्ट विद्यार्थी साहब –आयोग या जो body exams कराती है,या उसमें
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पंचतत्व बना ये देह-आओ करें ज्ञान की बातें
पंचतत्व बना ये देह, ता बोले एक हंस। पंचबली ए-महाभूत, जब फेरेगा काल।। टूटेगा बसेरा ए-मन, ता बोले एक हंस। साथ यम के चले ए-मन, ए-पिंजरा तब
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क्यों दिल उसी से उम्मीद लगा बैठता है
क्यों दिल उसी से उम्मीद लगा बैठता है जो हमारे उम्मीदों को तार तार करता है क्यों दिल उसी का चेहरा देखना चाहता है जो हमारे चेहरे को नपस�
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सड़क-ऊबड़-खाबड़ या समतल
ऊबड़-खाबड़ या समतल, चमचमाती चाहे रज ओढ़ी। मिट्टी, गिट्टी की बनी, चाहे सीमेंट रोड़ी। चले गंत्रिका मोटर गाड़ी, चाहे सीर की जोड़ी। चले र�
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प्रधानमंत्री के दावेदार
अभी विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस की खिचड़ी भली-भांति पकी नहीं है, उसमें नमक, तेल, मिर्च और मसाला पूरी तरह स
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यादों का झुरमुट खोल सखी-तेरे मन को बहुत ही भाएगा
यादों का झुरमुट खोल सखी तेरे मन को बहुत ही भाएगा जो भूल रूठा है तुमसे याद सहज आ जाएगा। मैं को मै से मत छीन सखी तेरी आदत में आ जाएगा तू ट
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