जीवन चक्र – राजेश कुमार

जीवन चक्र – राजेश कुमार

मेरे अजीज दोस्तों, यह जीवन की नैय्या बड़ी अजीव है। मनुष्य का जीवन 84 लाख योनियों की प्रकिया से गुजरने के पश्चात मिलता है। आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना मूल्यवान है। कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है जो जीवन पर्यन्त हमेशा सुखी और अजय रह सके। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में उतार- चढ़ाव आते -जाते रहते हैं, लेकिन कुछ व्यक्ति इन उतार -चढाव से भयभीत हो जाते है और बहुत गहरी निराशा जनक स्तिथि में प्रवेश कर जाते हैं और अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते हैं, दुखी और परेशान होते रहते हैं ।

दोस्तों, आज मैं आपको एक बात स्पष्ट कर दूँ कि सुख और दुःख नाम की कोई वस्तु होती ही नहीं है , यह तो हमारे मनोदशा के ऊपर निर्भर करता है कि आप किस परिस्थिति को दुःख मानकर परेशान हो रहें हैं। सीधे शब्दों में कहूँ तो कोई भी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति आपको दुःखी कर ही नहीं सकती, जब तक आप उस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त न करें। यह कथन मेरा नहीं “महत्मा बुद्ध” का है। ठीक इसी प्रकार इस समूची सृष्टि में कोई भी परिस्तिथि या व्यक्ति आपको हरा नहीं सकता जब तक आपका मन हार न माने। क्योंकि “मन के हारे हार और मन जीते जीत”

मेरे प्रिय मित्रों, मेरा सदैव से यही प्रयास रहा है कि मैं अपनी कलम से ऐसा कुछ लिखता रहूँ कि आपके जीवन में थोड़ा -बहुत सकारात्मक परिवर्तन ला सकूँ। यदि मैं ऐसा करने में लेशमात्र भी कामयाब रहता हूँ, तो अपने आपको बहुत सौभाग्यशाली मानूँगा।
धन्यावाद !

Rajesh Kumarराजेश कुमार
मुरादाबाद(उत्तर प्रदेश)

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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