लक्ष्मी का महत्व – हेमा पांडेय

लक्ष्मी का महत्व – हेमा पांडेय

हम भारतीय हिंदुओं के घर और व्यापार स्थल में लक्ष्मी का चित्र मूर्ति आज अवश्य होते हैं. जिनमें देवी लक्ष्मी लाल वस्त्र धारण किए हुए स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित कमल पर आसीन दोनों हाथों में पात्र लिए हुए तथा दो हाथियों द्वारा निरंतर जल वर्षा यह विग्रह सर्वत्र दिखाई देता है .लक्ष्मी को धन धान भाग्य शक्ति वैभव संतोष सौंदर्य उर्वरता शुभ सूचक देवी माना गया है .लक्ष्मी की कृपा से ही व्यक्तियों को सांसारिक सुख और पूर्णता प्राप्त होती है .लक्ष्मी के विवेचन में यह आता है कि वह बेचैन अथार्थ नया करने को तत्पर थोड़ी सनकी परंतु मात्र स्वरूपा और दोनों हाथ ऊपर किए हुए आशीर्वाद और वह अपने भक्तों को प्रदान करती हैं. लक्ष्मी का शुद्धतम पवित्र नाम श्री है .हर महत्वपूर्ण लेख पत्र पर यह अंकित किया जाता है .तथा भगवान गुरु साधु तथा सम्माननीय व्यक्तियों के नाम के पहले श्री का उच्चारण किया जाता है. श्री शब्द ही गंभीरता प्रभाव पूर्णता पवित्रता और अधिकार का सूचक है .जब यह शब्द बोला या लिखा जाता है तो ऐसा लगता है कि इस शब्द के पीछे एक प्रकाश है एक आशीर्वाद का प्रभाव है. जिस प्रकार ओम शब्द आध्यात्मिकता का घोतक है उसी प्रकार श्री शब्द संसार में सांसारिक स्थिति में ऊर्जा का घोतक है .संसार में लक्ष्मी प्रकृति के प्रभाव अधिकता उर्वरता और सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करती है. वह देवी के रूप में यह धरती की देवी है जो संसार का पालन पोषण करती हैं. श्रीदेवी के रूप में लक्ष्मी भाग्य की अधिष्ठात्री देवी है जो सांसारिक प्राणियों में शक्ति आनंद और संपन्नता का वर प्रदान करती है… लक्ष्मी का प्रभाव और वर प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मनुष्य को सांसारिक नियमों का शुद्धता से पालन करना आवश्यक है और संसार में उत्पत्ति विकास को शुद्ध भाव से देखना आवश्यक है

–हेमा पांडेय

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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