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सावन-शिवरात्रि – मुनीश महेन्द्रा

सत्यम शिवम सुंदरम…..सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। भगवान शिव की महिमा अपरम्पार है भगवान शिव को प्रसन्न करने का महापर्व है — श्रावण शिवरात्रि ।

कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि, मास शिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है। प्रतिवर्ष 12 मासिक शिवरात्रि आती है लेकिन मासिक शिवरात्रियों में दो विशेष होती है – महाशिवरात्रि (फाल्गुन मास) और श्रावण की शिवरात्रि मनुष्य के सभी पाप को धो देती है। श्रावण मास को भगवान शिव और माता गौरी का आशीर्वाद लेने के लिए पवित्र माना जाता है ऐसे में श्रावण की शिवरात्रि का विशेष महत्व है इस शिवरात्रि में व्रत रखने वालों अविवाहित जातको को मनचाहा वर/वधु मिलता है तथा दूसरी ओर विवाहित जीवन में प्रेम की भी वृद्धि होती है।

श्रावण की शिवरात्रि का पर्व शिवभक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा व भक्ति से मनाया जाता है। मैं (स्वयंभू) अभिषेक, धूप, दीप, अर्ध्य तथा पुष्प आदि के समर्पण करने से उतना प्रसन्न नहीं होता, जितना कि व्रत-उपवास से। व्रत का सम्पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए भक्तों को शिवपूजा और व्रत का पारण सूर्योदय व चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के समय में ही करना चाहिए। रात्रि में 4 प्रहर होते हैं और प्रत्येक प्रहर में शिव पूजा की जा सकती है। माना जाता है कि सावन के महीने में स्वयं भगवान शिव, माता गौरी, पुत्र गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने शिवगणों सहित श्रावण मास में पृथ्वीलोक में निवास करते हैं इसीलिए सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा का विधान है. शिव भक्त इस दिन उपवास और रात्रि को जागरण करते है तो भगवान शिव भक्तो को पापकर्म से बचाते हैं तथा क्रोध, लोभ, काम, मोह, आदि विकारों से मुक्त करके परम सुख-शान्ति, भोग, मोक्ष व ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।

श्रावण मास का प्रारम्भ एक विशेष संयोग के साथ हो रहा है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का दिन सोमवार है और श्रावण मास का प्रारम्भ 6 July (सोमवार) तथा समाप्ति 3 August (सोमवार) को ही है। इस श्रावण मास में कुल 5 सोमवार होंगे – प्रथम (6 July); द्वितीय (13 July); तृतीय (20 July, सोमवती अमावस), चतुर्थ (27 July) और पंचम (3 August).

महाशिवरात्रि पर क्या करे —
– महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प ले और भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, पंचामृत अभिषेक करें।
– बेलपत्र, पुष्प, भांग, धतूरा, आंकड़े के फूल, सूखे मेवे से भगवान शिव का श्रृंगार करें।
– प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 20 मिनट की अवधि) में भगवान शिव की पूजा करें, प्रदोषकाल में भगवान शिव की पूजा विशेष कल्याणकारी कही गयी है।
– भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रात्रि जागरण व चारों प्रहर पूजा करें।
– राहु केतु के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए राहु-केतु के बीज मन्त्र का जाप करे।
– कुंडली में चंद्रमा के अशुभ या विपरीत परिणाम को कम करने के लिए, भगवान शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए।

महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का बहुत महत्त्व माना गया है और इस पर्व पर रुद्राभिषेक करने से शरीर के सभी रोग और कुंडली के सभी दोष समाप्त हो जाते हैं—-
– सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव का जल से अभिषेक करें
– भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए दूध से अभिषेक करें
– धन लाभ, कर्ज से मुक्ति के लिए भगवान शिव का फलों के रस से अभिषेक करें
– शनि ग्रह की शांति के लिए भगवान शिव का काले तिल से अभिषेक करें
– संतान प्राप्ति, सुख-शांति के लिए शहद और गंगा जल से अभिषेक करें
– रोगों के नाश, दीर्घ आयु के लिए घी व शहद से अभिषेक करें
– शीघ्र विवाह के लिए शिवलिंग पर केसर मिला कर दूध चढ़ाएं और माँ पार्वती की भी पूजा करें।

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munish-Mahendra

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My name is Munish Kr. Mahendra, and I have 15 yrs experience working of astro solution, remedies etc… I have a bachelor’s degree in Mathematics, English & Economics. I consider myself a good Astrologer, and I have a good sense of humor. People find me to be an upbeat, self-motivated with excellent communication skills.

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