मैं जब चौदह साल का था तब मैं एक अनजान व्यक्ति से मिला मैं नहीं जानता था कि वह कौन है और न ही वह मुझे जानता था
हम दोनों विधालय साथ जाने लगे read more >>
उड़ने दो उन्हें खुले आसमान में फिर लौट कर वे ज़माने नहीं आते |जब माँ की ऊँगली पकड़ कर चलते होवे बहाने जीवन में फिर कभी नहीं आते |जब पापा के � read more >>
जब हम सफर पर निकले तो पता चला दुनिया में कई और भी हमसफर की तलाश में है ।
शराबी से पूछा तो पता चला जीवन का सार शराब में है ।
वैरागी के पास ग� read more >>
*छत्तीसगढ़ी प्रतीकात्मक बालगीत*
*1- ( अटकन )*
अर्थ-
जीर्ण शरीर हुआ जीव जब भोजन उचित रूप से निगल तक नहीँ पाता अटकने लगता है--
*2- ( बटकन )*
अर्थ-
read more >>
विध्यार्थी जीवन की सत्यता आज बताते है ।
पढाई के लिए हम घर छोड़ जाते है ।
कल जो नखरे दिखलाते थे वो आज चुप रह जाते है ।
खाते ते जो कल माँ के � read more >>
उम्र तेरा आठ का,
चेहरा लग रहा साठ का 2..
आंखों की वो चमक कहां?
और होठों की मुस्कान गई ।
पापा की घुड़सवारी,
और गांव की वो यारी।
बचपन! उदास � read more >>
एक स्कूल की एक ही क्लास में पढ़ने वाले काफ़ी बच्चे थे । उनमें दो दोस्त थे, उनमें से एक था बलविंदर (बल्ली) जो पढ़ाई में बहुत होशियार था हर � read more >>