प्रेम सु जिंदगी, प्रेम मे राम !
प्रेम ही जिंदगी के सब सुखों का नाम!!
मिले सतगुरु इतना !
प्रेम में रहे उतना!!
ऐसा भाग मेरा, सतगुरु मिले राम!
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जो मिला नहीं उसका ग़म कैसा
मिले बिना कर्म के वो फल कैसा
बड़ा लम्बा सफर है दोस्त “ज़िंदगी”,
चलते जाओ चलते जाओ.....
थकान न हुई तो सफर कैसा
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इस दिल में अरमान बहुत थे ,जबानी में हमारे भी नाम बहुत थे ।
जब टूटे तो विखर गये ,कुछ सुधरे तो कुछ विगड़ गए ।
कुछ निखरे तो कुछ राज बन गए ,कुछ ब� read more >>
कविता = ( फेसबुक )
लिखने का शौक़ था !
मुफ़लिसी का दौर था !!
पेट से मजबूर था !
तालीम से दूर था !!
जवानी का खून था !
दिल में जुनून था !!
शौक़ भी रं� read more >>