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यहां था कोहरा घना, मैं था अंधेरों से सना। तेरी जो धूप परी मुझ पे, मैं भी उजालों से बना। तेरी किरणों के फुहारों में, मन रोशनी से भींग गया। � read more >>
इतिहास गवाह है, हर युग की शिक्षा नीति और उसकी परिकल्पना समय की मांग और उससे मिलने वाले अनुमानित परिणामों की अपेक्षा के आधार पर बनाई जा� read more >>
चली आई मेरे आँगन में नंगे पाँव सूरज की पीली धूप/ उस आँगन को सुखाने जिसे निल्हा दिया था पूस की बरसात ने, चली आई मेरे आँगन में नंगे पाँ� read more >>
मेरे हृदय में तेरे धाम रे प्रियतमा ! हृदय में बस के - निर्दयी तू हँस के ; हृदय मेरा बिखर दिया - करके चूर - चूर , हृदय की रूधिर बना अत्रुनीर ; read more >>
ये कैसा दस्तूर है जिंदगी का, कोई रोता है कोई हंसता है, कोई पाता है कोई खोता है, जिंदगी के हर मोड़ पर एक नया रस्ता है। read more >>
ये चलती चलती हवा कुछ थम सी गई है, कुछ कह रही है संनसनाहट में, जिंदगी का रूख कब बदल जाए, इशारा कर रही है। read more >>
नारी हर रंग में रूप में धुप में छाब में जल में नीर में आग में अंगार में सुर में साज में राग में अनुराग में पात में उत्पात में प्रेम read more >>
मैं और तू (देह ) बैसे तो एक हैं पर हम दो हैं इक्क्षाये और समश्याए अलग हैं भिन हैं मैं और तू भी भिन हैं मैं तू नहीं तू मैं नहीं मैं तुझ � read more >>
है शाम का रंग! है श्याम का रंग!! दिल का  मेरा प्यारा! मेरा अपना काला रंग!! नकारता सभी की सत्ता को! विमुखता को व्यक्त ये करता है!! प्र read more >>
हर शब्दों को लिखा नहीं जाता, कुछ को भावो पर छोड़ा जाता है, समझने वाले समझ जाते हैं, कुछ लोग शब्दों के जाल में फंसे रहते हैं। read more >>
कुदरत के खेल निराले हैं, कहीं धूप कहीं छांव के पहरे हैं, क्या दास्तां है जिंदगी की, छिपे ये राज गहरे हैं। read more >>
जिंदगी एक पहेली हैं, जो आसानी से समझ नहीं आती, कौन सी हैं किताब , जो आसानी से पढ़ी नहींं जाती। read more >>
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