वहा चांद छुपा आईने में
रचनाये -प्रतिभा खडेकार
हे हे हे ला ला ला ला ला,,हे हे हे ला ला ला ला ला...
वहा चांद छुपा आईने में,, देखते मुस्कुरा त read more >>
कहानी - एक सफ़र (यात्रा वृतांत)
एक रोज़ मैं अपनी सहेलियों के साथ किसी काम से बाहर गई थी, उस सफ़र में मुझे एक बुजुर्ग औरत मिली, वह काफी परे� read more >>
तारीखें तय कर , इम्तिहान अभी......और ....बेजार होंगे....!
मुश्किल में है ।
मुकद्दर के सिकन्दर का अब हर ख्वाब ...
अपने फैसले पर ज़रा ग़ौर कर.....! read more >>
अपने पराये क्यों, लगने लगे हैं
रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं .
कल तलक जो साया बनकर ,साथ-साथ चलते
आज है ख़फ़ा जैसे ,अंजान हो कोई हम.
अ� read more >>
निशा से चला -
सारें दिशाओं से चला ;
पाला लिऐ पवन ,
ठिठुर रहा रज़ाई -
सारी रात -
ठिठुर के रज़ाई में लूँ अंगड़ाई ।
जल्दी से उठो सूरज भाई -
रा read more >>
माया की है दुनिया सारी, मतलब के दोस्त यार
जिसके पास है पैसा, उसी से करें प्यार।
खाली हाथ आता है, और खाली हाथ जाता है,,
फिर भी जिन्दगी भर पै read more >>
क्या आप भी किस्मत को मानते हो ?
मानते हो तो ?
किस्मत , है ही नहीं
क्यों की आप खुद अपनी किस्मत लिख सकते हो
इसके लिए आप को कर्म अच्छे करने ह� read more >>